जन जीवन हरियाली अंतर्गत हजारों करोड़ रुपए की गमन का समाज सेवक ने लगाया आरोप
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jun 23, 2026
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मुख्यमंत्री को आवेदन सौंप निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
निष्पक्ष जांच नहीं होने पर हाई कोर्ट में होगा जनहित याचिका दायर
बिहार-- जल-जीवन-हरियाली’ योजना में संभावित हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार की आरोप लगाते हुए समाजसेवक ने मुख्यमंत्री को सौपा पत्र, कहा निष्पक्ष जांच नहीं होने पर हाई कोर्ट में होगा जनहित याचिका दायर। आपको बताते चलें, की बिहार सरकार द्वारा संचालित ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के अंतर्गत वर्ष 2019 से 2022 तक लगभग ₹24,524 करोड़ खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022 से 2025 तक ₹12,568.97 करोड़ का बजट आवंटित किया गया तथा आगामी 2029-30 तक के लिए ₹245 अरब 11 करोड़ 55 लाख की नई योजना स्वीकृत की गई है।
सरकार द्वारा दावा किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत राज्य में 21 करोड़ 24 लाख 97 हजार 366 से अधिक पौधे लगाए गए हैं, 1 लाख से अधिक तालाब, आहर-पैन एवं 37 हजार से अधिक कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है तथा राज्य का हरित आवरण बढ़कर 15.5 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
किन्तु विभिन्न जिलों से प्राप्त शिकायतों, स्थानीय नागरिकों की सूचनाओं एवं जमीनी स्थिति को देखते हुए इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा एवं सरकारी धन की लूट की आशंका उत्पन्न हुई है। कई स्थानों पर पौधारोपण केवल कागजों में सीमित दिखाई देता है, जबकि अनेक जल संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
इसी संदर्भ में कैमूर किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य पंकज कुमार राय द्वारा आज राजधानी पटना पहुंच करके मुख्यमंत्री सचिवालय में लिखित आवेदन देकर बिहार सरकार से मांग की गई है कि राज्य के प्रत्येक जिले में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच समिति गठित कर ‘जल-जीवन-हरियाली’ योजना के अंतर्गत कराए गए सभी कार्यों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।
मांग की गई है कि जांच प्रक्रिया में सिविल सोसाइटी, किसान संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा निम्न बिंदुओं की जांच हो—
वास्तविक रूप से लगाए गए पौधों की संख्या एवं वर्तमान स्थिति
तालाब, आहर-पैन एवं कुओं के जीर्णोद्धार कार्यों का भौतिक सत्यापन
खर्च की गई सरकारी राशि एवं कार्य गुणवत्ता की जांच
संबंधित अधिकारियों, एजेंसियों एवं ठेकेदारों की भूमिका
साथ ही यह भी मांग की गई है कि यदि जांच में भ्रष्टाचार अथवा वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा दोषी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
कैमूर किसान यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यह जनता के टैक्स का पैसा है और बिहार की जनता सरकारी धन की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि राज्य सरकार निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करती है, तो इस मामले में माननीय पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
कैमूर किसान यूनियन जल जीवन हरियाली योजना के तहत हुए राज्य व्यापी घोटाले को उठा के कहीं न कहीं भोजपुर के भारत तिवारी की भावनाओं को आगे बढ़ा रहा है, अगर जिला अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री कार्यलय तक फरियाद करने के बाद भी भ्रष्टाचारियों को सजा नहीं होगी, तो ऐसे में किसान संगठनों का मनोबल कमजोर होगा, जनता को इस मामले में खुलकर के आगे आना चाहिए।
संगठन ने बिहार के सभी जिलों के नागरिकों, किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनसंगठनों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्रों में ‘जल-जीवन-हरियाली’ योजना से संबंधित भ्रष्टाचार या अनियमितता के प्रमाण एकत्र कर सरकार एवं संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाएं।


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