क्षेत्र धर्म जातियों में विभाजन के बाद सत्ता लोलुप परिवार को बांटने में विफल सरकार की मगरमच्छी आंसू नहीं तो और क्या?
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 26, 2026
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सत्ता लोलुप भेड़ की खाल में छुपे भेड़ियों की कुचक्र ही राष्ट्र को कर रहा छिन्न-भिन्न, सत्ता की चाह में मिथ्यावादी संभाषण राष्ट्र की पतन सुनिश्चित
लोकतंत्र की गिरती साख चारों स्तंभ लिंग, धर्म, जाति, क्षेत्र सहित पार्टियों में विभाजित
हिंदू शब्द इस्लामिक लूटेरों सहित राजनीतिक लूटेरों के द्वारा किया जाता है उल्लेख
राष्ट्र रक्षार्थ शासन प्रशासन सहित सरकार की विरोध के अतिरिक्त विकल्प नहीं
राष्ट्र की वर्तमान स्थिति को देखा जाए तो कभी धर्म, कभी जात के साथ ही जगह जगह क्षेत्र तो वर्तमान में लिंग का आधार सत्ता लोलुप वर्तमान सरकार की अवधारणा राष्ट्र को रहा छिन्न-भिन्न कर रहा है। सत्ता की चाह और पूंजी की लोभ में लोकतंत्र की चारों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता साख इस कदर तक गिर चुका है की अपनी जिम्मेवारियों को निभाने में अक्षम दिख रहा है।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सेना प्रमुख, समाचार पत्रों के संपादक सहित अन्य ऊंच पदों पर आसक्त होने के बावजूद भी सत्ता की लोलुपता जाती के आधार पर छूट प्राप्त करने हेतु अपने आप को पिछड़ा अति पिछड़ा समाज का घोषित करने में अनुभूति प्राप्त हैं। लोकतंत्र के चारों स्तंभों का कार्य, सत्ता के संतुलन, कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है, जहाँ विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है, न्यायपालिका उनकी व्याख्या करती है और मीडिया जनता को जागरूक करता है। पर वर्तमान समय में विधायिका वही कानून बना रही है जिससे उसकी आर्थिक लाभ व सत्ता बरकरार रहे।कार्यपालिका सही रूप से कानूनों को लागू करने और शासन चलाने, पर वर्तमान में देखा जाए तो मात्र जातिवाद में उलझा हुआ है।न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या करने और न्याय सुनिश्चित करने वाली स्वतंत्र संस्था है, पर वर्तमान में पूंजी पतियों की रखैल बनी हुई है।मीडिया राष्ट्रहित में सूचनाओं का प्रसार करने और जनता की राय बनाने वाला, पर सच में देखा जाए तो धर्म जाति लिंग व क्षेत्र सहित पार्टि के आधार पर विभाजित हो चुका है।
क्षेत्र धर्म जातियों में विभाजन के बाद सत्ता की लोलुपता लिंग के आधार पर परिवार को विभाजित करने का षणयंत्र
यदि सत्यता को देखा जाए तो सत्ता की लोलुपता में धर्म जाति व क्षेत्र के आधार पर राष्ट्र को विभाजित करने के बाद जब सत्तासीन भाजपा द्वारा यह देखा जा रहा है,की सवर्ण समाज का मत प्राप्त नहीं होगा, तो महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लाकर परिवार के अंदर मतभेद पैदा करने के साथ ही परिवार को भी विभाजित करने का षणयंत्र रचा जा रहा है। जैसे जातिगत आरक्षण को बढ़ावा देने में राजनीतिक पार्टियों का मानना है कि कुछ जातियां नीच जाति का है जबकि शास्त्रोक्त देखा जाए तो कोई भी जाती किसी जाति से नीचे नहीं है शास्त्रोंक्त कर्म को आधार माना गया और ऐतिहासिक भी देखा जाए तो तभी जातियों का अपना-अपना स्वराज रहा है। इस्लामी लुटेरों को आने से पहले कहीं भी छुआछूत या नीच जातियों का उल्लेख नहीं मिलेगा। पर वोट की राजनीति के चक्कर में सत्ता लोलुप पार्टियों द्वारा राष्ट्रवाद समाज में विभेद पैदा करते हुए जातिगत कानून को लाकर राष्ट्र को लूटने का कार्य किया जाता है।
अयोग्यता आरक्षण की समापन क्यों नहीं
यदि चर्चा की जाए तो यह स्पष्ट होगा कि अयोग्यता आरक्षण की वजह राष्ट्र में शिक्षा स्वास्थ्य सहित अन्य विभाग पीछे की ओर जा रहा है। पर राष्ट्र के लुटेरों द्वारा सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए ऐसे विनाशकारी कानून को सर्वसम्मति से पारित कर दिया जाता है। यदि देखा जाए तो महिला आरक्षण भाजपा के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है, जिसका उद्देश्य महिला मतदाताओं को रिझाना, अपनी छवि को महिला समर्थक बनाना और 2029 तक की चुनावी राजनीति में बढ़़त हासिल करना है। यदि सच कहा जाए तो जातिगत आरक्षण एवं यूजीसी एक्ट की वजह से भाजपा के मुख्य वोटर सवर्ण समाज भाजपा से अलग अलग दिखाई दे रहा है जिस वजह से भाजपा द्वारा महिला आरक्षण बिल ला परिवार के अंदर पति-पत्नी को भी विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिस पर विपक्ष द्वारा समर्थन न देकर परिवार के अंदर विभाजन करने की राजनीति को विफल किया गया। जब से महिला आरक्षण बिल विफल हुआ है, तभी से महामानव द्वारा जगह जगह मगरमच्छी की आंसू दिखाया जा रहा है। सत्ता की लोलुपता अयोग्यता आरक्षण को समाप्त नहीं होने दे रहा है।
मिथ्यावादी संभाषण सत्ता लोलुप भेड़ की खाल में छुपे भेड़ियों की चाल
पहले धर्म के आधार पर सत्ता प्राप्त करना उसके बाद जातियों में विभाजन करने के बाद परिवार को विभाजित करने के लिए ही महिला आरक्षण लाया गया है। जब जिस प्रदेश में चुनाव होता है तो उसे प्रदेश के हिसाब से मिथ्यावादी संभाषण दिया जाता है। जैसे बंगाल में योगी आदित्यनाथ के द्वारा चुनावी सभा को संबोधन करते हुए कहा गया कि यदि भाजपा की सरकार बनती है तो बंगाल में गौ माता को काटने नहीं दिया जाएगा। अब सोचने का विषय है कि केंद्र में 12 वर्षों से भाजपा की सरकार है साथ ही 10 वर्षों से उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही है तो क्या उत्तर प्रदेश गोकुशी बंद हो गया है क्या? यदि इस संभाषण का उचित अर्थ निकाला जाए तो योगी आदित्यनाथ का कहना है कि बंगाल में जब भाजपा की सरकार बनेगी तो बंगाल में गोकुशी बंद होगा और पूरे देश में गोकुशी होगा। भाजपा के द्वारा यह कहा जाना कि यदि चुनाव जीतते हैं तो हर घर में एक नौकरी दिया जाएगा, तो क्या अन्य प्रदेशों में जहां भाजपा की सत्ता है सभी घर के एक व्यक्ति को नौकरी मिल चुका है?यदि सच कहा जाए तो इन सत्ता लोलुप नेतृत्व कर्ताओं की बात को मान लिया जाए तो राष्ट्र की पतन निश्चित है। यदि स्पष्ट तौर पर यह कहा जाए की यह सभी भेड़ की खाल में छुपे हुए भेड़िए हैं तो गलत नहीं होगा।
आखिर हिंदू है कौन
शास्त्रोक्त और ऐतिहासिक उल्लेखों को देखा जाए तो हिंदू कोई धर्म है ना ही हिंदू कोई जाती है, ना हिंदू सभ्यता है ना ही हिंदू संस्कार है। हिंदू शब्द का उल्लेख पांचवीं छठवीं शताब्दी से पहले कहीं नहीं मिलेगा। तात्पर्य हिंदू शब्द का उल्लेख इस्लामीक लूटेरों के द्वारा किया गया और वर्तमान समय में राजनीतिक लूटेरों के द्वारा किया जाता है।
क्या भाजपा सनातन की हितैषी है
तो सच कहा जाए तो नहीं।भाजपा के शासनकाल आने के बाद से सनातन के प्रति सनातन के आराध्यों के प्रति सनातन धर्म द्रोहियों द्वारा खुले तौर पर अभद्र भाषाओं का प्रयोग किया जा रहा है, जिनका हिमायती भी भाजपा के लोग ही। एक तरफ सनातन धर्म द्रोहियों को बढ़ावा देकर सनातन के प्रति नफरत की भाषा का उल्लेख कराया जाता हैं। दूसरी ओर धर्म संकट में है का भय दिखाकर वोट की राजनीति किया जाता है।
लोकतंत्र की गिरती साख चारों स्तंभ लिंग धर्म जाति क्षेत्र सहित पार्टियों में विभाजित
यदि वर्तमान समय को देखा जाए तो लोकतंत्र की चारों स्तंभ की साख गिरवी रखा जा चुका है। उच्च पदों पर आसक्त होने के बावजूद भी लोग खुले मंच से धर्म जाति क्षेत्र और लिंग आधारित व्यवस्था की बात करते हैं। विधायिका का कार्य संविधान के तहत सभी के लिए सामान्य कानूने बनाना है, पर लोकतंत्र के मंदिर में खुलेआम धर्म जाति लिंग व क्षेत्र आधारित कानूनों का पैरवी किया जाता है, कार्यपालिका का कार्य सभी जाति धर्म लिंग क्षेत्र के लिए बने सामान्य कानूनों को लागू करना है। पर वर्तमान समय में कार्यपालिका के द्वारा भी जाति धर्म लिंग व क्षेत्र के आधार पर पालन कराया जाता है। न्यायपालिका का कार्य राष्ट्र हित में बने कानूनों को स्वतंत्र रूप से सुनिश्चित करना है। पर वर्तमान समय में देखा जाए तो न्यायालय धर्म जाति लिंग क्षेत्र सहित पूंजी पत्तियों के हाथ की कठपुतली बना हुआ है। पत्रकारिता का कार्य राष्ट्र हित में सूचनाओं का प्रसार करने और जनता की राय बनाने में योगदान होना चाहिए। पर वर्तमान समय में पत्रकारिता भी क्षेत्र जाति धर्म लिंग के आधार सहित पार्टियों में विभाजित है।
राष्ट्र रक्षार्थ हेतु शासन प्रशासन सहित सरकार की विरोध के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं
वर्तमान समय में देखा जाए तो धर्मद्रोहियों, समाज द्रोहियों, राष्ट्रद्रोहियों को खुले तौर पर छूट है। जब जहां विचार हो वहां संगठित हो सनातन धर्म, सनातन समाज, एवं राष्ट्र के विरुद्ध खुलेआम अभद्र भाषाओं का प्रयोग किया जाता हैं। वही जब राष्ट्रभक्तों द्वारा विरोध हेतु एकत्रित होने पर सरकार द्वारा प्रशासन की सहयोग ले रोक दिया जाता है। शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन पर भी रोक रहता है। जिससे कि यह प्रमाणित होता है कि धर्म समाज व राष्ट्र में विभाजनकारी राष्ट्रद्रोहियों को सरकार द्वारा पोषित किया जा रहा है। राष्ट्रभक्तों द्वारा शासन प्रशासन सहित सरकार की खुले तौर पर विरोध करो या मरो के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता।


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