नियत में खोट या मेटेरियल में दोष चारों तरफ भ्रष्टाचारियों का बोलबाला
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 10, 2026
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दुर्गावती संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय कि रिपोर्ट
दुर्गावती (कैमूर):--
अंग्रेजों के काल के बने पुलिया या कंस्ट्रक्शन का कोई कार्य सचमुच देखा जाए तो आज भी उसी तरह से जीवंत है जैसे पूर्व में थे। रोहतासगढ़ का किला हो या शेरगढ़ का किला या हावड़ा का पुल हो या हावड़ा का स्टेशन या रेल लाइन के अंदर जगह-जगह से बने बिना पाया दिए पुलिया पुल या बिना पाया दिए दुर्गावती का पुल आज भी उसी तरह से पड़े दिखाई देते हैं जैसे उसका अभी निर्माण हुआ है। लोग कहते हैं कि पूर्व काल से आज की तकनीकी ज्यादा विकसित हुई है तो कुछ हीं दिनों मे क्यों खराब हो जाती है या जगह-जगह पर ढलाई करते ही पुलिया भवन क्यों टूट जाती है क्या तकनीकी में दोष है या मेटेरियल में खराबी यह तो स्पष्ट होना चाहिए लेकिन स्पष्ट होने की जगह चुप्पी कई सवाल पैदा कर देती है। सफेद कुर्ते ईमानदारी की नौकरी अच्छी कंपनियों का मैटेरियल की सप्लाई की बात करने वाले लोग को स्पष्ट करना चाहिए की दोष कहां है। सच पूछिए तो इसकी जिम्मेवारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है हर रास्ते से गुजरने वाले सफेद पोश ईमानदार पदाधिकारी सभी मौन है। जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले गए टैक्स को बंदर बाट कर खाने वाले लोग कब तक यह सिलसिला जारी रखेंगे कुछ कहा नहीं जा सकता। क्योंकि जनता जात पात में बट कर लूटी जा रही है और जाति-पाक्तियों की राजनीति अपना घर स्थाई रूप से बनाती जारही हैं। प्रमाण में कभी लाल बहादुर शास्त्री तो कभी जयप्रकाश नारायण कभी लोहिया कभी कर्पूरी की बातें मंच की जाती है लेकिन धरातल पर काम उसके विपरीत हो रहा है।ढलाई का काम हो या बिल्डिंग का निर्माण नहर की खुदाई हो या आहार तालाब पोखरे का निर्माण सभी जगह एक ही धुन बज रहा है वह है भ्रष्टाचार। जनता अपना धन स्वयं लुटवा रही है जाती पाती आरक्षण और धर्म संप्रदाय में बटकर तो लूटने का दोषी किसे माना जाए भ्रष्टाचारियो को या जनता को चारों तरफ पर्दे पर यह दृश्य पूरे देश में चल रहा है और जनता तमाश बिन बन कर देख रही है।


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