तरियानी में मिट्टी ले रही है 'महासक्ति' का आकार: चैती नवरात्र को लेकर शिल्पकारों की साधना चरम पर

ब्यूरो चीफ अंकित कुमार की रिपोर्ट 

शिवहर-- प्रखंड तरियानी चैती नवरात्र की आहट के साथ ही शिवहर जिले का तरियानी प्रखंड भक्तिमय कला के रंग में डूबने लगा है। यहाँ की मिट्टी अब निर्जीव नहीं रही, बल्कि कुशल मूर्तिकारों की अंगुलियों के स्पर्श से 'महासक्ति' का स्वरूप ले रही है। श्रद्धा और शिल्प के इस अद्भुत संगम को देखने के लिए अभी से ही लोगों की उत्सुकता बढ़ने लगी है।

साधना और समर्पण की अनूठी दास्तां

तरियानी के मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में इन दिनों भारी चहल-पहल है। दिन-रात एक कर कलाकार मां दुर्गा के साथ-साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाओं को गढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार मूर्तिकार 'हाइपर-रियलिस्टिक' (अति-यथार्थवादी) तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिससे प्रतिमाओं में जीवंतता का एहसास हो रहा है।

शिल्पकारों की जुबानी: यह काम नहीं, मां की सेवा है

मिट्टी और पुआल के बीच पसीना बहा रहे एक स्थानीय मूर्तिकार ने बताया कि उनके लिए यह महज जीविकोपार्जन का जरिया नहीं, बल्कि एक वार्षिक साधना है। उन्होंने कहा:

"जब हम मां की आंखों को अंतिम रूप देते हैं, तो ऐसा लगता है मानो वे हमें देख रही हों। हमारी कोशिश है कि इस बार तरियानी की प्रतिमाएं पूरे जिले में मिसाल बनें।"

तैयारियां और उत्साह

काम की प्रगति: प्रतिमाओं का ढांचा तैयार है और करीब 60% काम पूरा हो चुका है।

अगला चरण: अब रंगों के चयन और बारीक साज-सज्जा (फिनिशिंग) पर काम शुरू होने वाला है।

बाजार की रौनक: पूजा समितियों ने पंडालों के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है और बाजारों में पूजा सामग्रियों की हलचल बढ़ गई है।

क्षेत्र के भक्तों को बेसब्री से उस पल का इंतजार है जब चैती नवरात्र के पहले दिन पट खुलेंगे और मां का यह अलौकिक रूप सबके सामने आएगा। तरियानी की यह कलात्मक पहल निश्चित रूप से इस बार के उत्सव को भव्य बनाने जा रही है।

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