गया में तेज आवाज़ वाले डीजे से बढ़ी परेशानी, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Feb 05, 2026
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संवाददाता पवन कुमार की रिपोर्ट
गया जी-- शहर में डीजे का हाई पिच और अत्यधिक वॉल्यूम में बजाया जाना आज एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्या बनता जा रहा है। तेज आवाज़ वाले डीजे साउंड से आम नागरिकों को तो परेशानी होती ही है, साथ ही हृदय रोगियों, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए यह सीधे तौर पर खतरा बन रहा है।
कई बार इतना तेज साउंड बजाया जाता है कि शरीर में कंपन महसूस होने लगता है, जिससे मानसिक तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। लगातार शोर-शराबे के कारण लोगों की दिनचर्या और शांति भी प्रभावित हो रही है।यह सर्वविदित है कि जिला प्रशासन द्वारा डीजे बजाने को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा चुकी है, जिसमें तय मानकों से अधिक आवाज़ पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद शहर के विभिन्न इलाकों में इन दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासन की गाइडलाइन का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य, शांति और मानवाधिकारों की रक्षा करना है।इस संदर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने कहा कि खुशी और उत्सव के अवसरों पर डीजे बजाना गलत नहीं है, लेकिन इसे हाई पिच और असहनीय वॉल्यूम में बजाना अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्सव का आनंद इस तरह होना चाहिए कि उससे किसी भी आम नागरिक को परेशानी या स्वास्थ्य संबंधी नुकसान न हो।
डॉ. मिश्रा ने जिला प्रशासन से मांग की कि डीजे संचालकों को सख्त निर्देश दिए जाएँ कि वे नियंत्रित वॉल्यूम और निर्धारित ध्वनि मानकों के भीतर ही डीजे बजाएँ। साथ ही गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि शहर में खुशी का माहौल भी बना रहे और आम नागरिकों का जीवन व स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।


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