कैमूर के पवंरा पहाड़ी स्थित मां मुंडेश्वरी धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

अनुमंडल संवाददाता सिगासन सिंह यादव की रिपोर्ट 

भभुआं(कैमूर)-- पहली जनवरी 2026 को नववर्ष के अवसर पर  अनुमंडल के भगवानपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित पवरा पहाड़ी पर विराजमान मां मुंडेश्वरी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। स्थिति यह रही कि लोगों को वाहनों से उतरकर कई किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सड़क पर इतनी भीड़ थी कि पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा था।

बताया जा रहा है कि यह भीड़ भगवानपुर थाना क्षेत्र की सामान्य व्यवस्था से कहीं अधिक थी। भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन की ओर से शुरुआती तौर पर पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखे। इसी को लेकर मौके पर मौजूद संवाददाता ने एसडीपीओ मनोरंजन भारती से संपर्क किया। बातचीत के दौरान एसडीपीओ ने बताया कि भभुआ के रतवार गांव के पास एक सड़क दुर्घटना की सूचना मिली है, जिस कारण वह फिलहाल वहीं पर व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि स्थिति को देखते हुए तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल मुंडेश्वरी धाम की ओर भेजा जाएगा।

एसडीपीओ के निर्देश के कुछ ही समय बाद दो बसों में सवार पुलिस जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस बल ने तत्परता दिखाते हुए जाम को नियंत्रित किया और मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते को साफ कराया, जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में सुविधा हो सकी। पुलिस की मौजूदगी के बाद स्थिति काफी हद तक सामान्य हुई।

हालांकि, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को पहले से ही अलर्ट रहना चाहिए था। नववर्ष और मां मुंडेश्वरी के प्रति श्रद्धा को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता था कि भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचेंगे। पहले के समय में जहां अधिकतर पुरुष ही पिकनिक या दर्शन के लिए जाया करते थे, वहीं अब महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक देखी जा रही है। यह बदलाव समाज में बढ़ती आस्था और सहभागिता को दर्शाता है।

भीड़ का आलम यह था कि मंदिर से काफी दूर, नहर के पास ही वाहनों को रोकना पड़ा। वहां से श्रद्धालु पैदल ही पहाड़ी चढ़कर मंदिर तक पहुंचे। बावजूद इसके, श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। “जय मां मुंडेश्वरी” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।

कुल मिलाकर, यह घटना प्रशासन के लिए एक सबक है कि ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर पहले से बेहतर तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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