मोटेशन के नाम पर अंचलाधिकारी द्वारा भारी-भरकम राशि की मांग करने का मुखिया सहित अन्य लोगों ने लगाया आरोप
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Aug 13, 2025
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संवाददाता सूचित पांडेय की रिपोर्ट
रामपुर(कैमूर)-- स्थानीय प्रखंड के मुख्यालय स्थित मनरेगा भवन में संचालित आरटीपीएस काउंटर के पास मंगलवार को खरेंदा पंचायत के मुखिया दीपक कुमार और अंचलाधिकारी अनु कुमारी के बीच मोटेशन रद्द होने और पैसे लेने को लेकर तीखी बहस हो गई। दरअसल मामला जमीन संबंधित दाखिल खारिज,परीमार्जन के नाम पर अवैध वसूली बताया जा रहा है। इस मामले में दोनों लोग आमने सामने आ गए। इस घटना के दौरान जब मीडिया कर्मियों द्वारा वीडियो बनाया जाने लगा तो अंचलाधिकारी मामला उलझता देख सीधे अपने गाड़ी में बैठ कर रवाना हो गई।
संदर्भ में मुखिया दीपक कुमार से जब वार्तालाप किया गया तो उन्होंने ने बताया कि गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा मोटेशन के लिए आवेदन किया गया था, जिनके द्वारा अंचल कार्यालय का लगातार दौड़ लगाया गया। लेकिन इस तरह काम नहीं हुआ तो सोचे कि पैसे देकर ही काम निकाला जाए। इसके बाद चौकीदार अवधेश कुमार के मार्फत दिवाकर पाण्डेय ने सात हजार रुपए दिये, लेकिन तीन माह बीतने के बावजूद मोटेशन नहीं हुआ, साथ ही उस आवेदन को 4 अगस्त को रिजेक्ट कर दिया गया। इसको लेकर मैं पूछने के लिए मंगलवार को अंचलाधिकारी के पास पहुंचा, तो उन्होंने मेरे साथ तुम तड़ाक के भाषा से बात करने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर अंचल में बिना राशि दिए वगैर कोई काम नहीं होता। उन्होंने बताया कि रामपुर अंचल में आपके काम के अनुसार राशि की मांग की जाती है अगर आप राशि देते है तो काम होता है, अगर आप नहीं देते है तो आप अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते रहिए। पर यहां सात हजार रुपए लेने के बावजूद भी आवेदन रिजेक्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के द्वारा जब इस तरह का व्यवहार सीओ द्वारा किया जा रहा तो बाकी अन्य जनता के साथ क्या होता होगा इसका आप लोग अंदाजा लगा सकते है।
वही मनरेगा कार्यालय के बाहर ठकुरहट गांव के बबन पांडेय मिले उन्होंने बताया भारत माला परियोजना में मेरा भूमि जा रहा है। उसमें करेंट रसीद मांगा जा रहा है। मेरे पास 2021 तक रसीद है। उसके बाद रसीद नहीं कट रहा है। मैं पिछले एक वर्ष से अंचल कार्यालय का दौड़ लगा रहा हुं, पर आज तक मुझे कोई आश्वाशन नहीं मिला और मेरा काम भी नहीं हो रहा है।
वही बड़कागांव गांव के वीरेंद्र दुबे ने बताया कि 10 महीने से परिमार्जन के लिए आवेदन किया है लेकिन कोर्ट से आदेश के बावजूद परिमार्जन नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया है। अब ऐसा क्यों किया जा रहा है कुछ समझ में नहीं आ रहा है। ऐसा लगता है कि पैसे के लिए ही कर्मचारियों द्वारा ऐसा किया जा रहा है, इसीलिए लागातार 10 महीने से दौड़ लगाना पड़ रहा है।
पुनाव गांव के पप्पू दुबे ने बताया कि सितंबर 2024 में परिमार्जन के लिए आवेदन किया था लेकिन आज 11 महीना हो गए लेकिन फिर भी उनका परिमार्जन नहीं हुआ है। दो बार आवेदन देने के बावजूद भी रिजेक्ट कर दिया गया। जबकि मेरे पास 2021 का रसीद है। लेकिन परिमार्जन नहीं किया जा रहा है।
जब इस मामले में अंचलाधिकारी अनु कुमारी से जब बात किया गया तो उन्होंने ने बताया कि खरेंदा पंचायत के मुखिया द्वारा मोटेशन के आवेदन में कोर्ट में केश डाला गया था, जिसके आदेश पर रिजेक्ट किया गया है। उनके द्वारा रही बात पैसे को लेकर जिनको पैसा दिए है उनसे समझे मैं नहीं जानती हूं। ये सब आरोप बेबुनियाद है. रही बात भारत माला में रसीद की तो मेरे द्वारा नया रसीद की मांग नही की जा रही है.पुराने रसीद पर ही ऑफ लाईन एलपीसी निर्गत किया जा रहा है. उनके पास प्रूफ है तो दे पंजी टू में संधारण किया जाएगा।


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