कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर एवं गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार के मध्य शैक्षणिक सहयोग हेतु ऐतिहासिक एमओयू संपन्न
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jul 24, 2026
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रोहतास।उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं संस्थागत विकास को नई दिशा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) एवं गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार, रोहतास (बिहार) के मध्य एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, कौशल विकास, पुस्तकालय एवं सूचना सेवाओं तथा संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान समय में उच्च शिक्षा केवल पारंपरिक शिक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ज्ञान के सृजन, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग–अकादमिक सहयोग, कौशल विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे क्षेत्रों में निरंतर विस्तार हो रहा है। ऐसे परिवेश में विश्वविद्यालयों के मध्य सहयोगात्मक साझेदारी शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालीन अकादमिक सहयोग का आधार बनेगा तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
इस समझौते के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम विकास, बहुविषयक शिक्षा, प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा कार्यक्रम, मूल्यवर्धित एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन में सहयोग करेंगे। साथ ही विषय विशेषज्ञों द्वारा अतिथि व्याख्यान, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विशेष कक्षाएँ, विशेषज्ञ संवाद तथा संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान, आधुनिक तकनीकों एवं वैश्विक शैक्षणिक दृष्टिकोण का लाभ प्राप्त होगा। एमओयू के तहत संकाय आदान-प्रदान को विशेष महत्व दिया गया है। दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षक एक-दूसरे के संस्थानों में अध्यापन, शोध निर्देशन, पाठ्यक्रम निर्माण, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं एवं अकादमिक गतिविधियों में सहभागिता करेंगे। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम , ओरिएंटेशन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त रूप से आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम भी इस समझौते का प्रमुख अंग होगा। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को अध्ययन भ्रमण, इंटर्नशिप, औद्योगिक प्रशिक्षण, स्टार्टअप गतिविधियों, नवाचार परियोजनाओं, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप क्रेडिट ट्रांसफर की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देंगे। विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, शिक्षा, प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण, सामाजिक विज्ञान तथा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान सहित विभिन्न विषयों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित की जाएंगी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण एजेंसियों के समक्ष संयुक्त शोध प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे तथा शोध निष्कर्षों के आधार पर पेटेंट, कॉपीराइट एवं तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। समझौते के अंतर्गत पुस्तकालय एवं सूचना संसाधनों के क्षेत्र में भी व्यापक सहयोग स्थापित किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालय मुद्रित एवं डिजिटल पुस्तकों, ई-जर्नल, शोध प्रबंध, डिजिटल रिपॉजिटरी तथा अन्य सूचना संसाधनों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे। सूचना साक्षरता, शोध पद्धति, शोध नैतिकता, संदर्भ प्रबंधन तथा साहित्यिक चोरी पर संयुक्त कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे शोध एवं अकादमिक गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी।


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