हौसले के लिए उम्र कोई सीमा नहीं: सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा में जुटे स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक

अनुमंडल संवाददाता सिगासन सिंह यादव की रिपोर्ट 

भभुआं (कैमूर)--- अनुमंडल क्षेत्र के हाटा स्थित पंजाब नैशनल बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक अशोक कुमार श्रीवास्तव इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि हौसले और सेवा की भावना के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। वर्ष 2022 में बैंक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने घर बैठने के बजाय पढ़ाई लिखाई जारी रखा।

शिक्षा ग्रहण के साथ साथ उनकी रुचि लेखन में भी है,पिछले साल उनकी लिखी कविता की पुस्तक परछाइयाँ प्रकाशित हुई है। सेवानिवृत्ति के उपरांत उन्होंने लगभग तीन वर्षों तक कैमूर में पंजाब नैशनल बैंक के वित्त एवं ऋण सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके साथ ही वे आरसेटी चैनपुर, कैमूर के विभिन्न विद्यालयों तथा जीविका केंद्रों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को वित्तीय साक्षरता, सुरक्षित बैंकिंग और साइबर अपराध से बचाव के प्रति लगातार जागरूक कर रहे थे 

शिक्षा के प्रति उनका समर्पण भी प्रेरणादायक है। जीवन के इस पड़ाव पर भी वे इग्नू से इतिहास में एम.ए. तथा अंग्रेजी ऑनर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। उनका मानना है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और ज्ञान ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

बैंक में अपने कार्यकाल के दौरान भी वे आम ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। शाखा में कर्मचारियों की कमी या अधिक भीड़ होने पर वे स्वयं काउंटर पर बैठकर ग्राहकों को नकद निकासी कराते थे और पासबुक प्रिंटिंग का कार्य भी अपने हाथों से करते थे, ताकि किसी ग्राहक को अनावश्यक परेशानी न हो।

उनका सरल, विनम्र और सहयोगी व्यवहार आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। अशोक कुमार श्रीवास्तव का जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा, सीखने की ललक और समाज के प्रति समर्पण ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होती है।

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