सिद्धाश्रम का मूलध्वज मंदिर
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Mar 17, 2026
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अनिल कुमार सिंह
ब्यूरो चीफ भोजपुर । पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम(मध्यप्रदेश) में शक्तिपुत्र जी महाराज द्वारा मूलध्वज साधना मंदिर की स्थापना की गई है जो एक अत्यंत सिद्ध और ऊर्जावान केंद्र है। यहाँ भक्तगण बैठ कर माँ गुरुवर के चरणों में ध्यान लगाते है और मंत्रों का जाप करते हैं और परिक्रमा लगते है। यह एक चैतन्य स्थल है जहां समर्पण के साथ मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यहाँ नित्यप्रति सुबह-शाम सम्पन्न होने वाले विशिष्ट आरतीक्रमों में उपस्थित जनसमुदाय के मन में सहज ही साधनात्मक प्रवृत्ति का उदय होता है और यह क्रम दिनचर्या के अंग बन जाते हैं। इन साधनात्मक क्रमों को अपनाकर आज देशभर में लाखों लोग अपने जीवन में प्रकृतिसत्ता व गुरुसत्ता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
मूलध्वज की स्थापना के उपरान्त ही ऋषिवर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने घरों में शक्तिध्वज लगाने का कल्याणकारी पथ प्रदान किया है। मान्यता है कि ध्वज की बनावट में निहित वास्तु मनुष्य के लिए सदैव कल्याणकारी होती है।
आपने देखा होगा कि लोग वास्तु दोष के नाम पर अपना बना बनाया मकान तुड़वा देते है लेकिन गुरुवर ने कहा है कि अपने घरों में मां का ध्वज लगा दो इससे सभी वास्तु दोष खत्म हो जाते है। वे कहते है कि अपने घरों को पहले मंदिर का स्वरूप दो अर्थात अपने घरों में सद्भावनापूर्ण वातावरण रखो एक दूसरे के साथ विनम्रता से पेश आओ। गुरुवर कहते हैं कि जो भक्त अपने घरों में मां का मूल ध्वज लगाते है उनके घरों में कोई आसुरी शक्ति प्रवेश नहीं करती और सात्विक ऊर्जा तरंगें आकर्षित होती है। भविष्य में समाज मुख्य मूलध्वजस्थल पर वह अद्भुत निर्माण कार्य भी देखेगा, जिसमें सच्चिदानंदस्वरूप योगेश्वर स्वामी श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की उपस्थिति और निर्देशन में हजारों-हजार वर्ष के लिए यज्ञशाला का निर्माण होगा और एक ऋषि के करकमलों द्वारा ऐसे प्रभावी महाशक्तियज्ञ संपन्न किये जायेंगे, जो समाज के लिए युगपरिवर्तनकारी सिद्ध होंगे।


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