भिवंडी में सपा की अंदरूनी सियासत गरमाई
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Jan 09, 2026
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बागी विधायक रईस शेख के खिलाफ उम्मीदवारों का मोर्चा
भिवंडी। भिवंडी में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। महानगर पालिका की 90 सीटों के लिए हो रहे चुनाव के बीच सपा उम्मीदवारों और पार्टी के ही विधायक रईस कासम शेख के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि सपा उम्मीदवारों ने बागी रुख अपनाने वाले विधायक के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध और राजनीतिक दबाव की रणनीति अपना ली है।
जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने भिवंडी की 90 सीटों में से 59 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को साइकिल निशान पर मैदान में उतारा है। पार्टी को उम्मीद थी कि मौजूदा विधायक रईस कासम शेख संगठन को मजबूती देंगे, लेकिन इसके उलट विधायक ने पार्टी लाइन से हटकर कदम उठाते हुए अपने समर्थकों को कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) से सपा उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार दिया है। इतना ही नहीं, भिवंडी पूर्व और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक रईस शेख पर आरोप है कि वे सपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने के बजाय कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) के प्रत्याशियों के समर्थन में गली-गली, नुक्कड़ सभाएं और जनसभाएं कर रहे हैं। विधायक की इस भूमिका से सपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इस नाराजगी के बीच अब सपा उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं ने एक नया रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि जिन इलाकों में विधायक रईस शेख कांग्रेस या राकांपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार या रैली करेंगे, वहां सपा कार्यकर्ता पहुंचकर “समाजवादी पार्टी जिंदाबाद” के नारे लगाएंगे। हाल ही में कुछ स्थानों पर सपा उम्मीदवारों द्वारा विधायक रईस शेख का फूल बरसाकर स्वागत किए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसे सियासी गलियारों में व्यंग्यात्मक विरोध और दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सपा नेताओं का कहना है कि विधायक रईस शेख ने अब तक न तो पार्टी से इस्तीफा दिया है और न ही विधायक पद छोड़ा है। ऐसे में पार्टी के भीतर रहकर विरोधी दलों के लिए प्रचार करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। सपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर विधायक पार्टी में हैं तो उन्हें सपा उम्मीदवारों के लिए ही काम करना चाहिए।भिवंडी की राजनीति में यह घटनाक्रम चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना रहा है। एक ओर विपक्षी दल इस अंदरूनी खींचतान से फायदा उठाने की कोशिश में हैं, वहीं दूसरी ओर सपा नेतृत्व के सामने भी अनुशासन और संगठन को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस बगावत पर क्या कदम उठाती है और इसका असर चुनावी नतीजों पर किस रूप में दिखाई देता है।


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