10 को भाकपा माले का सासाराम में होगा कार्यक्रम


रोहतास । अखिल भारतीय खेत-मजदूर किसान-सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन 10 सितम्बर को सासाराम के फजलगंज न्यू स्टेडियम में आयोजित होगा, जिसमें कुल 12 प्रदेशों से आये लगभग चार सौ प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। उक्त बातें एआइकेएमकेएस बिहार के सचिव अशोक बैठा ने सासाराम में एक प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने प्रेस को बताया कि देश में चल रहे जनवादी आंदोलनों के दबाव में 2006 में यूपीए की सरकार ने वन-सम्पदा पर आदिवासियों और अन्य स्थानीय लोगों के परम्परागत अधिकारों की रक्षा के नाम पर वन अधिकार कानून 2006 बनाया था। जबकि 2014 में भाजपा की सरकार के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद से जनपक्षीय कानून को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। वन संरक्षण संशोधन अधिनियम-2023 उसी दिशा में एक प्रयास है। बिहार के कैमूर जिले में व्याघ्र अभ्यारण्य परियोजना की घोषणा भी उसी नापाक कोशिश का हिस्सा है। अशोक बैठा ने कहा कि हम आदिवासी इलाकों के जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों और अन्य स्थानीय निवासियों के परम्परागत अधिकारों के हिमायती हैं तथा जंगल, पहाड़ और खनिज-सम्पदाओं से भरपूर आदिवासी क्षेत्र के खनिज-सम्पदाओं को औने-पौने दाम में देश के कॉरपोरेट घरानों एवं विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को सौंप देने की जनविरोधी नीति के घोर विरोधी हैं। किसान सभा के सचिव ने कहा कि शासक-वर्ग की समस्त पार्टियाँ और उनके नेतृत्व में बनी केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तक जनविरोधी एवं सम्राज्यवादपरस्त नव- उदारवादी आर्थिक नीतियों को लागू करती रही हैं। साथ ही बड़े पूँजीपतियों और बड़े भूस्वामियों के निहित स्वार्थोँ में लिप्त ये अखिल भारतीय तथा क्षेत्रीय पार्टियाँ भी हमेशा खेत-मजदूरों, गरीब किसानों एवं मझोले किसानों के हितों के विरुद्ध ही काम करते देखी गयी हैं। उन्होंने कहा कि एआइकेएमकेएस आयोजित अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि-क्षेत्र और किसानों कि समस्याओं को रेखांकित करने, उसका सही ढंग से विश्लेषण करने तथा उसका वैज्ञानिक एवं जनपक्षीय समाधान निकालने का भरपूर प्रयास करेगा।

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